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Committed To Lord Krishna

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दम दे मिया वे असा नौकर तेरे नौकर तेरे - नौकर तेरे, असा नौकर तेरे दम दे मिया वे असा नौकर तेरे नौकर तेरे - नौकर तेरे,असा नौकर तेरे दम दे पिया वे असा नौकर तेरे एस विगड़ी नु अल्लाह आप सवारे एस विगड़ी नु अल्लाह आप सवारे झगड़े वि सारे आप नवीड़े दम दे मिया वे असा नौकर तेरे नौकर तेरे - नौकर तेरे, असा नौकर तेरे दम दे पिया वे असा नौकर तेरे इश्क समन्दर गोरख धंदा इश्क समन्दर गोरख धंदा ओधर जावन डुब जान जेडे दम दे मिया वे असा नौकर तेरे नौकर तेरे - नौकर तेरे, असा नौकर तेरे दम दे पिया वे आसा नौकर तेरे आसा प्यार करदे, करदे ने गल्ला असा प्यार करदे, करदे ने गल्ला दावे करण लाये होर भतेरे दम दे मिया वे असा नौकर तेरे नौकर तेरे - नौकर तेरे, असा नौकर तेरे दम दे पिया वे आसा नौकर तेरे

Beautiful Proses from Ghazals and Poems

1) KHUDA MUJHE ITNI KHUDAI NA DE, KI MUJHE APNE SIWA KOI DIKHAI NA DE. AUR MUJHE AISI JANNAT NA DE JAHAN SE MUJHE MADINA DIKHAI NA DE. 2) MAALIK TU RAHE AUR TERI RAZA RAHE.BAKI NA MAIN RAHU NA KOI ARZOO RAHE. 3) MAIN KHWAB KHWAB JISE DHUDTA PHIRA BARSON....... WO ASHK ASHK MERI AANKH MEIN SAMAYA HAI........ 4) KOI GESU KOI ANCHAL HAMEIN AWAZ NA DE. AB KISI ANKH KA KAJAL HUMEIN AWAZ NA DE HUM HAIN KHAMOSH TO KHAMOSH HI REHNE DO HUMEIN KOI HULCHUL KOI AAHAT HUMEIN AWAZ NA DE HUMNE TANHAI KO MEHBOOB BANA RAKHA HAI RAKH KE DHER NE SHOLON KO DABA RAKHA HAI..... 5) KHAMKHA PEDONKA GUZARNA KHAMAKHA RASTONKA CHALNA KYA HAI YUHI KAHI GIRNA GIRKE PHIRSE SAMBHALNA KYA HAI DIL MEIN LAKHON SAWALON KA JALNA.... DIL KI MERE KHATA YE TO NAHI KE MAINE BATAYA NA KABHI KE TUNE SATAYA HAI MUJHE KITNA..... TUMNE BHI TO DIKHAYA NA KABHI YA PHIR SIKHAY...

हालत एक गरीब किसान की-कवि नरसिंह

A beautiful, soulful poem by the legendary poet of Haryana-Kavi Narsingh कात्तिक बदी अमावस थी और दिन था खास दीवाळी का - आंख्यां कै म्हां आंसू आ-गे घर देख्या जिब हाळी का । कितै बणैं थी खीर, कितै हलवे की खुशबू ऊठ रही - हाळी की बहू एक कूण मैं खड़ी बाजरा कूट रही । हाळी नै ली खाट बिछा, वा पैत्यां कानी तैं टूट रही - भर कै हुक्का बैठ गया वो, चिलम तळे तैं फूट रही ॥ चाकी धोरै जर लाग्या डंडूक पड़्या एक फाहळी का - आंख्यां कै म्हां आंसू आ-गे घर देख्या जिब हाळी का ॥ सारे पड़ौसी बाळकां खातिर खील-खेलणे ल्यावैं थे - दो बाळक बैठे हाळी के उनकी ओड़ लखावैं थे । बची रात की जळी खीचड़ी घोळ सीत मैं खावैं थे - मगन हुए दो कुत्ते बैठे साहमी कान हलावैं थे ॥ एक बखोरा तीन कटोरे, काम नहीं था थाळी का - आंख्यां कै म्हां आंसू आ-गे घर देख्या जिब हाळी का ॥ दोनूं बाळक खील-खेलणां का करकै विश्वास गये - मां धोरै बिल पेश करया, वे ले-कै पूरी आस गये । मां बोली बाप के जी नै रोवो, जिसके जाए नास गए - फिर माता की बाणी सुण वे झट बाबू कै पास गए । तुरत ऊठ-कै बाहर लिकड़ ग्या पति गौहाने आळी का - आंख्यां कै मांह आंसू आ-गे घर देख्या जब हा...

Mile Na Phool To...

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मिले न फूल तो काटों से दोस्ती कर ली मिले न फूल तो काटों से दोस्ती कर ली इसी तरह से बसर हम ने ज़िन्दगी कर ली मिले न फूल अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा खुदा तराश लिया और बंदगी कर ली मिले न फूल तो काटों से दोस्ती कर ली नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया नज़र मिली भी न थी और उन को देख लिया जुबान खुली भी न थी और बात भी कर ली वो जिन को प्यार है चांदी से इश्क सोने से वो ही कहेंगे कभी वो ही कहेंगे कभी हम ने ख़ुद खुशी कर ली मिले न फूल तो काटों से दोस्ती कर ली इसी तरह से बसर हम ने ज़िन्दगी कर ली मिले न फूल Penned by Kaifi Azmi, this song from the 1968 movie Anokhi Raat goes much deeper than just being about lost love! Rather than being sad I see this as an expression of rebellious, ‘will do no matter what’ attitude of the poet. Specially the line ‘khuda tarash liya’ which I very pitifully translate into – I sculpted my own god and I now pray to ...

यदि वाणी भी मिल जाए दर्पण को

A masterpiece by Shri Gopal Das Neeraj Ji. सुन्दरता ख़ुद से ही शरमा जाए यदि वाणी भी मिल जाए दर्पण को ! खुबसूरत है हर फूल मगर उसका कब मोल चुका पाया है सब मधुबन ? जब प्रेम समर्पण देता है अपना सौन्दर्य तभी करता है निज दर्शन , अर्पण है सृजन और रुपान्तर भी , पर अन्तर - योग बिना है नश्वर भी , सच कहता हूँ हर मूरत बोल उठे दो अश्रु हृदय दे दे यदि पाहन को ! सुन्दरता ख़ुद से ही शरमा जाए यदि वाणी भी मिल जाए दर्पण को। सौ बार भरी गगरी आ बादल ने प्यासी पुतली यह किन्तु रही प्यासी , साँसों ने जाने कैसा शाप दिया बन गई देह हर मरघट की दासी दुख ही दुख है जग में सब ओर कहीं , लेकिन सुख का यह कहना झूठ नहीं , ‘ सब की सब सृष्टि खिलौना बन जाए यदि नज़र उमर की लगे न बचपन को !’ सुन्दरता ख़ुद से ही शरमा जाए यदि वाणी मिल जाए दर्पण को ! रुक पाई अपनी हँसी न कलियों से दुनिया ने लूट इसी से ली बगिया इस कारण कालिख मुख पर मली गई बदशक्ल रात पर मरने लगा दिया , तुम उसे गालिय...